Saturday, 6 December 2008

लाइव प्रसारण (कविता)

कुबेर नाथ

एक
रिपोर्टर
ब्रेकिंग न्यूज की तलाश में
सुबह से शाम तक
दोड़ता-भागता
देर रात घर पहुँचता है
और सोचता है कि
आज तो मेरे
चैनल का टीआरपी
हाई हो जाएगा
क्योंकि
सबसे पहले
हमने ही दिखाया
देश के लिए
अपनी शहादत देने वाले
वीर जवान
की विधवा को मुआवजे के लिए
मंत्रालय के सामने
आत्मदाह करते हुए...
लाइव प्रसारण।

सुंदर कम्यून(कविता)

इसमे कोई बात नही है
दोस्तों, साथियो, मेरे परिवार वालो की
हमारी मुद्रा रानी के पीछे
सोना नहीं है
लेकिन है पूँजी की तीन जिल्दें
जिनका बेश मूल्य कोई माप नही सकता
हमारा विस्वास कीजिये
हम अपने लोकोमोटिव
आपके खेतों पर से नहीं लेकर जायेंगे
और न ही समाजवाद द्वारा बनाये
घरों पर से
लेकिन हम किसी के रोके
रुकेंगे नहीं
ये अब एक ही जगह पहुँच कर
ख़ुद व ख़ुद
रुकेंगे
और वह है हमारी अपनी
प्यारी, सुंदर कम्यून।
--बलदेव शर्मा

ऑफिस छूट न जाए (कविता)

घर से ऑफिस जाते समय
रास्ते में
मेरी माँ की शक्ल की
एक ओरत को
बस ने धक्का मारा
मेरे सामने
खून से लथपथ
सहायता के लिए
चीखती, चिल्लाती
चोराहे के बीच
मैं देख कर
अनदेखा करके
आगे बद्द गया
बाइक पर पीछे बैठे
मेरे मित्र ने कहा
हमलोग कितने संवेदनहीन हो गए हैं
मैंने कहा -
कहीं इसके चक्कर में
ऑफिस छूट न जाये
चलो जल्दी चलें ।
-कुबेर नाथ

तेरी मेरी बात(कविता)

अभी अभी जो बात हुई है
अभी अभी जो तुमने जाना है
क्या तुमने भी वह माना है
तेरी मेरी थी जो
बात वही कही हमने आज
जब तक है तेरी मेरी सांस
क्या हो पायेगा सच, क्या
बदलती तुम्हारी दुनिया में
जहाँ तुम्हारी दुनिया सिर्फ़ तुम्हारी
होती है , हमेशा मुझसे अलग
लेकिन तुम निर्भर ही होती हो
हमेशा इसी दुनिया में किसी न किसी पर
तुमने चाहा है मुझे
मैंने चाहा तुम्हे हर बार
तब भी.
----अंजाना